न मै गिरा, न मेरी उम्मीद

न मै गिरा, न मेरी उम्मीद की कोई दीवार ही गिरी
मुझको गिराने की कोशिश मे कुछ लोग कई बार गिरे
मेरे कदम मंजिल की तरफ बढ़ते ही रहे
कभी तेज तो कभी धीरे-धीरे
रूकावट के दौर मे भी मेरे विश्वास से
रंग-बिरंगी होती गई मेरी तस्वीरे
काले पत्थर मे होते है जैसे चमकते हीरे